जीवन की क्योंकि अपनी मौजूदगी तो उधार की है। जीवन की क्योंकि अपनी मौजूदगी तो उधार की है।
नतमस्तक हो गई मानवता देखो जरा इनके संस्करों को नतमस्तक हो गई मानवता देखो जरा इनके संस्करों को
ये लंगोटधारी ये लंगोटधारी
ये कविता हर इंसान के लिए है, महज़ लड़कियों के लिए नहीं, हर उस इंसान के लिए, जो सांस ले रहा है, जी रहा ... ये कविता हर इंसान के लिए है, महज़ लड़कियों के लिए नहीं, हर उस इंसान के लिए, जो सां...
लूट गया सब कुछ यूं खड़ा खड़ा बूंद बूंद वो गिर पड़ा.. लूट गया सब कुछ यूं खड़ा खड़ा बूंद बूंद वो गिर पड़ा..
इस कविता में मैंने एक मानवीकरण उपकरण द्वारा उन सब से सवाल करने की कोशिश की है , जिसके लिए इंसान हर ... इस कविता में मैंने एक मानवीकरण उपकरण द्वारा उन सब से सवाल करने की कोशिश की है ,...